आयुर्वेद पांच हजार साल पुरानी चिकित्सा पद्धति है, जो हमारी आधुनिक जीवन शैली को सही दिशा देने और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी आदतें विकसित करने में सहायक होती है। इसमें जड़ी बूटि सहित अन्य प्राकृतिक चीजों से उत्पाद, दवा और रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ तैयार किए जाते हैं। इनके इस्तेमाल से जीवन सुखी, तनाव मुक्त और रोग मुक्त बनता है।
यह शब्द ’आयुष्$वेद‘ इन दो शब्दों के मेल से बना है। ’आयुष्‘ का अर्थ है-’जीवन‘, तथा ’वेद‘ का अर्थ है -विज्ञानं ‘।
इस प्रकार, ’आयुर्वेद‘ शब्द का अर्थ हुआ-’जीवन का विज्ञान‘। साधारण भाषा में कहें तो जीवन को ठीक प्रकार से जीने का विज्ञान ही आयुर्वेद है, क्योंकि यह विज्ञान केवल रोगों की चिकित्सा या रोगों का ही ज्ञान प्रदान नहीं करता, अपितु जीवन जीने के लिए सभी प्रकार के आवश्यक ज्ञान की प्राप्ति कराता है।
बहुत सीमित अर्थ में ही हम इसे एक चिकित्सा प्रणाली भी कह सकते हैं, क्योंकि यह स्वास्थ्य-रक्षा और रोग- निवारण, दोनों के लिए व्यवस्थित और क्रमबद्ध ज्ञान भी प्रस्तुत करता है। वास्तव में यह विज्ञान मनुष्य ही नहीं, अपितु प्राणिमात्र के कल्याण के लिए ही उनके शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक सभी पक्षों पर प्रभाव डालता है। महर्षि चरक ने ’चरक-संहिता‘ नामक ग्रन्थ में आयुर्वेद की परिभाषा देते हुए भी कहा है – जिसमें हित आयु, अहित-आयु, सुख आयु और दुख आयु का वर्णन हो, उस आयु के लिए हितकर (पथ्य) व अहितकर (अपथ्य) द्रव्य, गुण, कर्म का भी वर्णन हो एवं आयु का मान (प्रमाण या अवधि) व उसके लक्षणों का वर्णन हो, उसे आयुर्वेद कहते हैं2। इससे स्पष्ट होता है कि आयुर्वेद के ये सिद्धान्त किसी विशेष व्यक्ति, जाति या देश तक सीमित नहीं हैं, ये सार्वभौम3 (सभी जगह लागू होने वाले) हैं। जिस प्रकार जीवन सत्य है, उसी प्रकार ये सिद्धान्त और नियम भी सभी स्थानों पर मान्य और सत्य हैं, अतः शाश्वत, सार्वभौम एवं सर्वजनीन हैं। इनमें ’सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः‘ अर्थात् ’सभी सुखी हों और सभी निरोग हों‘ का भाव निहित है। निष्कर्ष के रूप में आयुर्वेद एक चिकित्सा-पद्धति होने के साथ-साथ एक संपूर्ण जीवन-पद्धति व साधना-पद्धति भी है।
Ayurveda is a five thousand year old system of medicine, which is helpful in giving right direction to our modern lifestyle and developing habits beneficial for health. In this, products, medicines and substances used in everyday life are prepared from other natural things including herbs. Their use makes life happy, stress free and disease free.
The word 'Ayushveda' is made up of a combination of these two words. 'Ayush' means 'life', and 'Veda' means 'science'.
Thus, the meaning of the word 'Ayurveda' is - 'Science of life'. In simple language, Ayurveda is the science of living life properly, because this science does not only provide knowledge of diseases or ailments, but also provides all kinds of necessary knowledge to live life.
In a very limited sense, we can also call it a medical system, because it also presents systematic and systematic knowledge for both health-prevention and disease-prevention. In fact, this science affects not only humans, but all their physical, mental and spiritual aspects for the welfare of all living beings. Maharishi Charak has also given the definition of Ayurveda in the book named 'Charak-Sanhita' - in which there is a description of age of age, age of harm, age of happiness and age of sorrow, beneficial (Pathya) and harmful (Apathy ) for that age. Substance, quality, action should also be described and the value of age (evidence or duration) and its symptoms should be described, it is called Ayurveda. It is clear from this that these principles of Ayurveda are not limited to any particular person, caste or country, they are universal (applicable everywhere). Just as life is true, similarly these principles and rules are also valid and true at all places, hence eternal, universal and universal. In these, the feeling of 'Sarve Bhavantu Sukhinah, Sarve Santu Niramayah' means 'May all be happy and may all be healthy'. In conclusion, Ayurveda is a medical system as well as a complete lifestyle and spiritual practice.
आयुर्वेदः पञ्चसहस्रवर्षीयः चिकित्साव्यवस्था अस्ति, या अस्माकं आधुनिकजीवनशैल्याः सम्यक् दिशां दातुं स्वास्थ्याय लाभप्रदानां आदतीनां विकासाय च सहायकः अस्ति। अस्मिन् दैनन्दिनजीवने प्रयुक्ताः उत्पादाः, औषधानि, पदार्थाः च ओषधीभिः सह अन्येभ्यः प्राकृतिकवस्तूनाभ्यः निर्मिताः भवन्ति । तेषां उपयोगेन जीवनं सुखदं, तनावमुक्तं, रोगमुक्तं च भवति ।
'आयुष$वेद' इति शब्दः एतयोः शब्दयोः संयोगेन निर्मितः । 'आयुष' इत्यर्थः 'जीवनम्', 'वेद' इत्यर्थः 'विज्ञानम्' इति ।
एवं 'आयुर्वेद' शब्दस्य अर्थः - 'जीवनविज्ञानम्' इति । सरलभाषायां आयुर्वेदः जीवनं सम्यक् जीवितुं विज्ञानम् अस्ति, यतः एतत् विज्ञानं न केवलं रोगानाम् अथवा रोगानाम् ज्ञानं प्रदाति, अपितु जीवनं जीवितुं आवश्यकं सर्वं ज्ञानं अपि प्रदाति।
अत्यन्तं सीमितरूपेण वयं तां चिकित्साव्यवस्था इति अपि वक्तुं शक्नुमः, यतः स्वास्थ्यनिवारणस्य रोगनिवारणस्य च कृते व्यवस्थितं व्यवस्थितं च ज्ञानं अपि प्रस्तुतं करोति वस्तुतः एतत् विज्ञानं न केवलं मनुष्यान्, अपितु सर्वेषां शारीरिक-मानसिक-आध्यात्मिक-पक्षेषु सर्वेषां प्राणिनां हिताय प्रभावितं करोति । महर्षि चरकेन 'चरक-संहिता' इति पुस्तके आयुर्वेदस्य परिभाषा अपि दत्ता अस्ति - यस्मिन् वयसः, हानिवयो, सुखस्य आयुः, शोकवयोः, हितकरस्य (पाठ्यस्य) हानिकारकस्य च (अपथ्यस्य) वर्णनम् अस्ति । अस्मात् स्पष्टं भवति यत् आयुर्वेदस्य एते सिद्धान्ताः कस्मिंश्चित् व्यक्तिविशेषे, जातिविशेषे, देशे वा सीमिताः न सन्ति, ते सार्वत्रिकाः (सर्वत्र प्रयोज्यः) सन्ति। यथा जीवनं सत्यम्, तथैव एते सिद्धान्ताः नियमाः अपि सर्वत्र मान्याः सत्याः च सन्ति, अतः शाश्वताः, सार्वत्रिकाः, सार्वत्रिकाः च सन्ति । एतेषु 'सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामायः' इति भावस्य अर्थः 'सर्वे सुखिनः सन्तु सर्वे स्वस्थाः भवन्तु' इति भावः । उपसंहारः आयुर्वेदः चिकित्साव्यवस्था अपि च सम्पूर्णजीवनशैली आध्यात्मिकः अभ्यासः च अस्ति ।